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पहले तो डंडे से पीटकर कुत्ते की ले ली जान, फिर उसकी याद में बना दी समाधि
पहले तो डंडे से पीटकर कुत्ते की ले ली जान, फिर उसकी याद में बना दी समाधिराजधानी रायपुर से महज 97 किमी दूर बालोद जिले का खपरी गांव है. यहां अजीबोगरीब कुकुरदेव का मंदिर है. मान्यता है कि यहां दर्शन करने से कुकुर खांसी व कुत्ते के काटने का कोई भय नहीं रहता है. चौदहवीं शताब्दी में बने इस मंदिर को 1993 से पुरातत्व विभाग ने अपने अधीन किया.
राजधानी रायपुर से महज 97 किमी दूर बालोद जिले का खपरी गांव है. यहां अजीबोगरीब कुकुरदेव का मंदिर है. मान्यता है कि यहां दर्शन करने से कुकुर खांसी व कुत्ते के काटने का कोई भय नहीं रहता है. चौदहवीं शताब्दी में बने इस मंदिर को 1993 से पुरातत्व विभाग ने अपने अधीन किया.