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संविधान पर चर्चा : इंदिरा की बहादुरी का जिक्र और फिर सुनाई शायरी, मल्लिकार्जुन खरगे ने जानिए क्या क्या कहा

संविधान पर चर्चा : इंदिरा की बहादुरी का जिक्र और फिर सुनाई शायरी, मल्लिकार्जुन खरगे ने जानिए क्या क्या कहाParliament Winter Session : लोकसभा में संविधान पर तीखी बहस के बाद राज्यसभा में सोमवार को इस विषय पर चर्चा की गई. उच्च सदन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संविधान पर चर्चा पर बहस की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान ने कई संकटों का सामना किया है और उनसे बच गया, जो इसकी विकास क्षमता को दर्शाता है. वहीं विपक्ष की ओर से चर्चा की शुरुआत मल्लिकार्जुन खरगे ने की. उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी की सरकार के समय बांग्लादेश की आजादी का जिक्र करते हुए कहा कि एक लाख लोगों को बंदी बनाना आसान काम नहीं था, लेकिन इंदिरा गांधी ने बता दिया था कि हमारे देश के करीब आए तो खैर नहीं. हम तो सरकारी स्कूल में पढ़े हैं, वे जेएनयू में पढ़े हैं, अंग्रेजी भी उनकी ज्यादा अच्छी हो सकती है, लेकिन उनकी करतूत अच्छी नहीं है. वहीं चर्चा के आखिर में भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पूरे पूर्वी गोलार्द्ध में यदि देखा जाए तो पूर्ण लोकतंत्र, जीवंत लोकतंत्र और लगातार लोकतंत्र सिर्फ भारत में है. लोकतंत्र में आज दुनिया की 34 फीसदी आबादी है, जिसमें 17 प्रतिशत अकेले हम हैं. Parliament Winter Session :

Parliament Winter Session : भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पूरे पूर्वी गोलार्द्ध में यदि देखा जाए तो पूर्ण लोकतंत्र, जीवंत लोकतंत्र और लगातार लोकतंत्र सिर्फ भारत में है. लोकतंत्र में आज दुनिया की 34 फीसदी आबादी है, जिसमें 17 प्रतिशत अकेले हम हैं. 
Bol CG Desk (L.S.)

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