50 करोड़ से चमकेगा आंबेडकर अस्पताल, पहले बाहरी हिस्से को किया जाएगा रेनोवेट, पीडब्ल्यूडी ने जारी किया टेंडर

रायपुर। 32 साल पुराना और प्रदेश का सबसे बड़ा आंबेडकर अस्पताल 50 करोड़ से चमकेगा। इसमें 16.17 करोड़ रुपए नेहरू मेडिकल कॉलेज के ऑटोनॉमस फंड से खर्च होंगे। इसकी स्वीकृति पहले ही मिल गई है। हालांकि जानकार केवल 32 साल पुरानी बिल्डिंग को भारी-भरकम लागत से रेनोवेट करने पर सवाल उठा रहे हैं।
पीडब्ल्यूडी ने अस्पताल के रेनोवेशन के लिए टेंडर कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार सिविल कार्य में 27.41 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। यानी बिल्डिंग के मेंटेनेंस में ये राशि खर्च होगी। बिजली के वायर बदलने में 3.75 करोेड़ रुपए खर्च होंगे। सीएम राहत कोष से 16.77 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसकी प्रशासकीय स्वीकृति मिल गई है। ऑटोनॉमस खाते से मिलने वाली राशि की स्वीकृति मेडिकल कॉलेज के डीन ने दे दी है। 50 करोड़ सिविल वर्क व बिजली के वायर बदलने में खर्च होंगे।
अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार बिल्डिंग का रेनोवेशन जरूरी है। इससे बिल्डिंग मजबूत होगी और मरीजों का बेहतर इलाज करने में आसानी होगी। रेनोवेट करने की योजना न्यू ट्रामा वार्ड में आगजनी की घटना के पहले बनाई गई है। करीब दो साल पहले 5 नवंबर 2024 को ओटी में आग लग गई। हाल में ग्राउंड फ्लोर के ट्रामा सेंटर में एसी का कंप्रेसर फटने से धुआं भर गया था, जिससे मरीजों को आनन-फानन में आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा था।
1995 में बनना शुरू हुआ भवन अभी है मजबूत स्थिति में
आंबेडकर अस्पताल 1995 में बनना शुरू हुआ था। करीब तीन से 4 साल में बिल्डिंग का निर्माण पूरा कर लिया गया था। सिविल विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बिल्डिंग का जीवन उनके निर्माण मटेरियल पर निर्भर करता है। हालांकि बिल्डिंग 40 से 50 साल या इससे ज्यादा तक टिक जाती है। इसके बाद बिल्डिंग को व्यापक मेंटेनेंस की जरूरत होती है। यही कारण है कि अस्पताल प्रबंधन ने रेनोवेशन की योजना बनाई है। ताकि बिल्डिंग की लाइफ बढ़ सके। अस्पताल के कुछ हिस्से जर्जर होने की कगार पर है। टायलेट व बाथरूम की स्थिति देखकर इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। कई बार इनका मेंटेनेंस भी किया गया। इसके बाद भी दीवार कई जगहों से उखड़ रही है।
ऑटोनॉमस फंड का उपयोग ऐसे
- डाॅक्टरों को वेतन की अतिरिक्त राशि देने में।
- कुछ कर्मचारियों को वेतन देने में।
- जरूरी इंप्लांट, दवा व उपकरण में।
- शासन फंड न दे तो इमरजेंसी में उपयोग।


