विश्वकर्मा जयंती महोत्सव में पहुंचे सांसद बृजमोहन अग्रवाल, बोले- शिल्पकारों का हुनर सृष्टि के निर्माण की रीढ़

रायपुर। राजधानी रायपुर में भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन श्री विश्वकर्मा समाज की ओर से शहीद स्मारक भवन में किया जा रहा है। सांसद अग्रवाल ने भगवान विश्वकर्मा का स्मरण करते हुए पूरे विश्वकर्मा समाज और उपस्थित लोगों को जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा समाज के पारंपरिक शिल्पकारों और कारीगरों का हुनर देश और समाज के निर्माण की महत्वपूर्ण आधारशिला रहा है।
बचपन की यादों को किया साझा
कार्यक्रम के दौरान बृजमोहन अग्रवाल ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए रामसागरपारा और बढ़ईपारा से जुड़े पुराने समय का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि रामसागरपारा और बढ़ईपारा दोनों अलग नहीं हैं। बचपन से ही उन्होंने विश्वकर्मा समाज के लोगों की कला, मेहनत और हुनर को करीब से देखा है।उन्होंने पुराने दौर का जिक्र करते हुए कहा कि जब बैलगाड़ियां परिवहन का प्रमुख साधन थीं, तब सुबह करीब चार बजे से ही लकड़ी आनी शुरू हो जाती थी। बैलगाड़ी और उसके पहियों के निर्माण का काम विश्वकर्मा समाज के कारीगर करते थे। यहां तैयार होने वाले पहिए छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में जाते थे। सांसद ने कहा कि शिल्पकारी का हुनर अक्सर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता है। जिस परिवार में कोई शिल्पकार या कलाकार होता है, वहां छोटे बच्चे भी बचपन से ही उस काम को सीखने लगते हैं। इस तरह पूरा परिवार शिल्प साधना से जुड़ जाता है।
पीएम विश्वकर्मा योजना का किया उल्लेख
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि पारंपरिक कारीगरों के इसी हुनर और मेहनत को पहचान दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ शुरू की गई है। इसका उद्देश्य लोहार, बढ़ई, स्वर्णकार और अन्य पारंपरिक शिल्पकारों को आधुनिक संसाधनों के साथ आगे बढ़ने का अवसर देना और उनके हुनर को नई पहचान दिलाना है। उन्होंने कहा कि देश के विकास में आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक कौशल की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। विश्वकर्मा समाज की पीढ़ियों से चली आ रही कला और शिल्प परंपरा को संरक्षित करते हुए नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
छत्तीसगढ़ की औद्योगिक ताकत का जिक्र
कार्यक्रम में सांसद अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा और औद्योगिक क्षमता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा ने पूरी सृष्टि के निर्माण की परिकल्पना की और आज उनके वंशज निर्माण की इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज देश में रॉकेट और चंद्रयान जैसे अत्याधुनिक उपकरण बनाए जा रहे हैं। उन्होंने भिलाई स्टील प्लांट का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां उत्पादित लोहे की चादरों का उपयोग विभिन्न औद्योगिक कार्यों में किया जाता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में लोहा, बॉक्साइट, एल्युमिनियम, पत्थर, बिजली, निकल और टिन जैसे प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता का भी जिक्र किया। साथ ही उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा और मोबाइल बैटरी में उपयोग होने वाला लिथियम कोरबा क्षेत्र में मिलने से राज्य की खनिज संपदा में एक और महत्वपूर्ण संसाधन जुड़ा है।
निर्माण में भगवान विश्वकर्मा के आशीर्वाद का महत्व
सांसद अग्रवाल ने कहा कि जिस निर्माण की नींव भगवान विश्वकर्मा की पूजा और उनके आशीर्वाद से रखी जाती है, वह निर्माण मजबूत और अटूट रहता है। उन्होंने विश्वकर्मा समाज की परंपराओं और सामाजिक योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज ने अपने पारंपरिक हुनर के जरिए न केवल स्थानीय जरूरतों को पूरा किया, बल्कि निर्माण और शिल्प की समृद्ध परंपरा को भी आगे बढ़ाया है। ऐसे आयोजनों से समाज की नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपरा से जुड़ने का अवसर मिलता है।
आयोजन के लिए जताया आभार
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पांच दिवसीय विश्वकर्मा जयंती महोत्सव के आयोजन के लिए श्री विश्वकर्मा समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों का आभार जताया। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों की समृद्धि, सुख और उन्नति की कामना की। कार्यक्रम में विधायक सुनील सोनी, छत्तीसगढ़ लौह शिल्पकार विकास बोर्ड के अध्यक्ष प्रफुल्ल विश्वकर्मा, छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया समेत विश्वकर्मा समाज के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।



