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अटूट दोस्ती और अच्छी फसल की कामना के लिए छत्तीसगढ़ में मनाया गया भोजली पर्व
अटूट दोस्ती और अच्छी फसल की कामना के लिए छत्तीसगढ़ में मनाया गया भोजली पर्वछत्तीसगढ़ का यह लोकपर्व रक्षाबंधन के दूसरे दिन यानी कि कृष्णपक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया गया. दरअसल, भोजली को घर में टोकरी में उगाने के लिए गेहूं के दाने को भिगोकर फिर बोया जाता है. सात से नव दिन तक विधि-विधान से इसकी पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता है कि भोजली का अच्छा होना अच्छे फसल का संदेश भी माना जाता है.
छत्तीसगढ़ का यह लोकपर्व रक्षाबंधन के दूसरे दिन यानी कि कृष्णपक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया गया. दरअसल, भोजली को घर में टोकरी में उगाने के लिए गेहूं के दाने को भिगोकर फिर बोया जाता है. सात से नव दिन तक विधि-विधान से इसकी पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता है कि भोजली का अच्छा होना अच्छे फसल का संदेश भी माना जाता है.
