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भोपाल गैस ट्रैजडी: उस काली रात मौत ने पूरे शहर को निगल लिया… नेता बचते रहे, शहर रोता रहा

भोपाल गैस ट्रैजडी: उस काली रात मौत ने पूरे शहर को निगल लिया… नेता बचते रहे, शहर रोता रहाअंधेरी रात किसे कहते हैं, पूछिए भोपाल के उन लोगों से जिन्होंने अपनी जिंदगी को एक पल में बिखरते देखा. उस रात, मौत ने इस शहर को निगल लिया, और पीछे छोड़ गए सिर्फ दर्द, चीखें और कभी न खत्म होने वाला अंधेरा … इस रात ने सिर्फ जिंदगियां ही नहीं छीनीं, बल्कि उम्मीद, प्यार और इंसानियत को भी दफन कर दिया … वरिष्ठ पत्रकार और एनडीटीवी के पूर्व ब्यूरो चीफ राजकुमार केसवानी ने इस त्रासदी की चेतावनी सालों पहले दे दी थी. उनके लेख ‘बचाइए हुजूर, इस शहर को बचाइए’ और ‘भोपाल एक ज्वालामुखी के मुहाने पर बैठा है’ एक मूक चीख थी … लेकिन प्रशासन, सरकार और यूनियन कार्बाइड ने इन्हें नजरअंदाज कर दिया .जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के यूनियन कार्बाइड से रिसने के साथ ही, भोपाल एक गैस चेंबर बन गया … माताएं अपने बच्चों को छोड़ भागीं, बच्चे अपने माता-पिता को … लेकिन मौत की रफ्तार सबसे तेज थी . जब शहर शोक मना रहा था, तब नेता और अधिकारी खुद को बचाने में लगे थे. मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ‘प्रार्थना’ के लिए इलाहाबाद चले गए . अर्जुन सिंह ने बाद में अपनी आत्मकथा ‘द ग्रेन ऑफ सैंड इन दि ऑवरलैस ऑफ टाइम में सफाई दी कि वो इलाहाबाद के गिरजाघर में प्रार्थना करने गए थे और उसी शाम भोपाल लौट आए थे . एंडरसन, जो इस त्रासदी का मुख्य दोषी था, को गिरफ्तार किया गया, लेकिन उसे वीआईपी ट्रीटमेंट मिला .अर्जुन सिंह ने लिखा, “जब मैंने हरदा में चुनाव प्रचार के दौरान राजीव गांधी को एंडरसन की गिरफ्तारी की सूचना दी, तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. उसी समय हमारे मुख्य सचिव ब्रह्म स्वरूप का वायरलेस संदेश मिला. इसमें बताया गया कि दिल्ली से केंद्रीय गृह मंत्रालय का एक वरिष्ठ अधिकारी बार-बार कॉल कर रहा है और एंडरसन को जमानत देने तथा राज्य विमान से दिल्ली भेजने का निर्देश दे रहा है. अर्जुन सिंह ने खुलासा किया कि गृह मंत्रालय से कॉल करने वाले अधिकारी आर.डी. प्रधान थे. बाद में पता चला कि आर.डी. प्रधान ने यह कॉल केंद्रीय गृह मंत्री पीवी नरसिम्हा राव के निर्देश पर किया था. नेताओं की भूमिका पर आज सत्ता या विपक्ष कोई ज्यादा बात नहीं करना चाहता.फिर वॉरेन एंडरसन कभी भारत नहीं आयामामले की जांच सीबीआई ने की, 2010 में अदालत ने यूनियन कार्बाइड की भारतीय सहायक कंपनी और उसके सात अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई. हालांकि, सभी ने जुर्माना भरकर 14 दिन में जमानत ले ली। वहीं, मुख्य आरोपी वॉरेन एंडरसन कभी भारत नहीं आया. इंसाफ तो छोड़िये – आज तक सरकार ये नहीं बता पाई कि इस हादसे में कितने लोगों की मौत हुई. केन्द्र सरकार भोपाल गैस त्रासदी में मृतकों के आंकड़े को 5295 बताती रही है,मध्यप्रदेश सरकार 15342 और ICMR के मुताबिक इस हादसे में लगभग 25000 लोगों की मौत हुई. जबकि हजारों पीड़ित आज तक तिल तिल मर रहे हैं. पीड़ितों की कानूनी लड़ाई अब भी जारी है. 615 करोड़ रुपये का मुआवजा पीड़ितों को बांटा गया, लेकिन कई को मात्र ₹25,000 मिले.

भोपाल गैस त्रासदी भारत के मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी मानी जाती है. इसके साथ ही इस मामले में सत्ताधीशों के एक आरोपी को भगाने के खेल में शामिल होने के भी आरोप लगे.
Bol CG Desk (L.S.)

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