पूर्व डिप्टी सीएम के बेटे-बहू और पोती की हत्या, दो की उम्रकैद बरकरार, तीन बरी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरबा के बहुचर्चित ट्रिपल मर्डर केस (पूर्व डिप्टी सीएम के बेटे-बहू और पोती की हत्या) में अपना फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने पांच आरोपियों में से दो की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है, जबकि साक्ष्यों के अभाव में तीन को बरी कर दिया।
कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि केवल संदेह या कॉल डिटेल के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यह मामला कोरबा का है, जहां पूर्व डिप्टी सीएम प्यारेलाल कंवर के बेटे हरीश कंवर, बहू सुमित्रा और पोती याशिका की उनके घर में ही निर्मम हत्या कर दी गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोट और धारदार हथियार से हमले की पुष्टि हुई थी। जांच में हत्या की वजह संपत्ति और पारिवारिक पेंशन को लेकर चल रहा पुराना विवाद सामने आया था।
दो को सजा, तीन को संदेह का लाभ
अदालत ने परमेश्वर कंवर और रामप्रसाद मननेवार के खिलाफ चश्मदीद गवाह जीवन बाई के बयान, शरीर पर चोट के निशान, बरामद हथियार और एफएसएल रिपोर्ट को पुख्ता साक्ष्य मानते हुए उनकी सजा बरकरार रखी। वहीं, हरभजन कंवर, धनकुंवर और सुरेंद्र सिंह के खिलाफ केवल कॉल डिटेल को पर्याप्त प्रमाण नहीं माना गया। कोर्ट ने अपने आदेश में दोहराया कि संदेह कितना भी गहरा क्यों न हो, वह कानूनी प्रमाण का स्थान नहीं ले सकता। इसी आधार पर साक्ष्यों की कमी के चलते तीन आरोपियों को बरी कर दिया गया।



