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खामेनेई की ललकार के बाद मिडिल ईस्ट में कैसा है मुस्लिम देशों का अलाइंमेंट? इजरायल से जंग हुई तो कौन किसके साथ?

खामेनेई की ललकार के बाद मिडिल ईस्ट में कैसा है मुस्लिम देशों का अलाइंमेंट? इजरायल से जंग हुई तो कौन किसके साथ? मिडिल ईस्ट में तनाव हर दिन बढ़ता जा रहा है. एक तरफ इजरायल फिलिस्तीनी संगठन हमास के साथ गाजा पट्टी में जंग लड़ रहा है. दूसरी ओर उसने लेबनान में भी हमले करने शुरू कर दिए हैं. इजरायल की सेना लेबनान में मिलिशिया ग्रुप हिज्बुल्लाह के ठिकानों को टारगेट कर रही है. उधर, इजरायल के कट्टर दुश्मन ईरान भी आसमान से बम बरसा रहा है. ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने शुक्रवार को तेहरान की ग्रैंड मस्जिद में हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने से पहले नमाज पढ़ी. इस दौरान खामेनेई ने दुनिया के मुसलमानों को दुश्मन इजरायल के खिलाफ एकजुट होने की अपील की.खामेनेई ने कहा, “दुनिया में एक भी ऐसी अदालत नहीं है, जो फिलिस्तीनियों को अपनी जमीन की हिफाजत करने के लिए दोषी ठहरा सके. इजरायल का सामना करने के लिए अरब देशों को साथ आना होगा. इजरायल का खात्मा जरूरी है.” खामेनेई ने कहा कि मंगलवार को इजरायल पर हुआ मिसाइल अटैक बहुत छोटी सजा थी. जरूरत पड़ी तो फिर हमला करेंगे. इजरायल और ईरान में कौन कितना ताकतवर?ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स के मुताबिक, इजरायल का सैन्य बजट 19.2 अरब डॉलर का है. ईरान का सैन्य बजट   7.4 अरब डॉलर का है. वर्ल्ड रैंकिंग में इजरायल 17 नंबर पर आता है. जबकि ईरान 14 नंबर पर है. इजरायल के पास  6 लाख 34 हजार सैनिक हैं. ईरान के सैनिकों की संख्या 6 लाख 10 हजार है. इजरायल के पास 4 लाख 65 हजार रिजर्व सेना है. ईरान के पास 3 लाख 50 हजार रिजर्व सेना है. इजरायल के पास 400 टैंक हैं. ईरान के पास 1513 टैंक हैं. इजरायल के पास 503 तोप हैं और ईरान के पास 6798+ तोप हैं. इजरायल के पास 46 फाइटर हेलीकॉप्टर हैं. ईरान के पास 50 फाइटर हेलीकॉप्टर हैं. न्यूक्लियर हथियारों की बात करें तो इजरायल के पास अनुमानित 90 प्लस वॉरहेड्स हैं, जबकि ईरान के न्यूक्लियर हथियारों के बारे में पब्लिक डोमेन में कोई जानकारी नहीं है. इजरायल के पास आयरन डोम है. ईरान के पास अनगिनत ड्रोन और मिसाइलें हैं.जंग का फरमान सुनाने वाले खामेनेई को जानिएपिछले 35 साल से ईरान में आयतुल्ला अली ख़ामेनेई का फ़रमान चलता है. 1989 में इस्लामी क्रांति के नेता आयतुल्लाह ख़ुमैनी के गुज़रने के बाद से अली ख़ामनेई ईरान के सुप्रीम सियासी और मज़हबी लीडर हैं. जब ये बोलते हैं, तो हैं पूरी दुनिया ध्यान से इन्हें सुनती है. क्योंकि इनके बयानों से पता लगता है आने वाला समय अमन का होगा या जंग का. 85 साल के अली ख़ामेनेई आमतौर से जनता के बीच दिखाई नहीं देते. लेकिन, जब भी कोई अहम मौका होता है, कोई बड़ा संदेश देना होता है तो वो जुमे के रोज़ नमाज़ पढ़ाते हैं और ख़ुतबा देते हैं. साढ़े चार साल पहले भी जब ईरानी कमांडर क़ासिम सुलेमानी को अमेरिका ने मारा था, उसके बाद अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने बाद भी जुमे की नमाज़ पढ़ाई थी.39 साल पहले मार्च 1985 में तेहरान यूनिवर्सिटी में जब खामनेई जुमे का खुतबा दे रहे थे, तो एक आत्मघाती बम का धमाका हुआ. इसमें हमलावर के अलावा अन्य लोगों की भी मौत हो गई, लेकिन बस तीन मिनट रुकने के बाद खामनेई ने अपना संबोधन जारी रखा.ईरानी प्रमुख अपने सख़्त तेवरों से न सिर्फ़ अपने मुरीदों में जोश भर देते हैं, बल्कि अरब देशों के उन शासकों के लिए भी एक चुनौती पेश करते हैं जो न तो युद्ध चाहते हैं और न ही ईरान के समर्थन हैं. लेबनान में जमीनी कार्रवाई के दौरान 2,000 से अधिक “सैन्य ठिकानों” पर हमले किए गए : इजरायल

खामेनेई ने कहा, “दुनिया में एक भी ऐसी अदालत नहीं है, जो फिलिस्तीनियों को अपनी जमीन की हिफाजत करने के लिए दोषी ठहरा सके. इजरायल का सामना करने के लिए अरब देशों को साथ आना होगा. इजरायल का खात्मा जरूरी है.”
Bol CG Desk (L.S.)

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