Jammu Kashmir Article 370 : अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला
जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार की ओर से निरस्त किए गए अनुच्छेद 370 के कदम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को अपना फैसला सुनाएगा.
शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ फैसला सुनाएगी. बेंच में जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं.

किसने किए थे जम्मू-कश्मीर के विलय पत्र पर हस्ताक्षर?
एससी ऑब्जर्वर वेबसाइट पर प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, 26 अक्टूबर 1947 को जम्मू और कश्मीर के आखिरी शासक महाराजा हरि सिंह ने भारत में शामिल होने के लिए विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे. वह संसद की ओर से तीन विषयों पर शासन किए जाने पर सहमत हुए थे और संघ की शक्तियों को विदेशी मामलों, रक्षा और संचार तक सीमित कर दिया था.
26 जनवरी 1950 को लागू हुआ भारत का संविधान
26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था. इसके अनुच्छेद 370 ने तीन व्यापक रूपरेखाएं निर्धारित कीं. अनुच्छेद 370 में कहा गया था कि भारत अपनी सरकार की सहमति के बिना विलय पत्र से निर्धारित दायरे के बाहर जम्मू-कश्मीर में कानून नहीं बनाएगा.
इसमें कहा गया कि भारत को राज्यों का संघ घोषित करने वाले अनुच्छेद 1 और अनुच्छेद 370 को छोड़कर संविधान का कोई भी हिस्सा जम्मू और कश्मीर पर लागू नहीं होगा. भारत के राष्ट्रपति संविधान के किसी भी प्रावधान को ‘संशोधनों’ या ‘अपवादों’ के साथ जम्मू-कश्मीर में लागू कर सकते हैं लेकिन इसमें राज्य सरकार के साथ परामर्श करना होगा.
इसमें कहा गया कि अनुच्छेद 370 को तब तक संशोधित या निरस्त नहीं किया जा सकता जब तक कि जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा इस पर सहमति न दे दे.
अनुच्छेद 370 के तहत राष्ट्रपति का पहला संवैधानिक आदेश
26 जनवरी 1950 को तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने अनुच्छेद 370 के तहत अपना पहला आदेश, संविधान (जम्मू और कश्मीर के लिए आवेदन) आदेश, 1950 जारी किया था, जिसमें संसद की ओर से जम्मू-कश्मीर में प्रयोग की जाने वाली शक्तियों का दायरा और पूर्ण सीमा स्पष्ट की गई थी.
राष्ट्रपति के आदेश में अनुसूची II भी पेश की गई थी, जिसमें राज्य पर लागू होने वाले संविधान के संशोधित प्रावधानों को सूचीबद्ध किया गया था.
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