भारत में नहीं होगा तेल संकट, पहले ही खरीद लिया 20 मिलियन बैरल रूसी तेल

ईरान। ईरान से जंग शुरू होने के बाद आशंका थी कि भारत में भी तेल संकट हो सकता है। तब सरकार ने बताया था कि भारत के पास अभी करीब 50 दिन का तेल रिजर्व है। रॉयटर्स के मुताबिक, दो सीनियर अमेरिकी अधिकारियों ने गुरुवार को रॉयटर्स को बताया कि वाशिंगटन ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों से जुड़ी मौजूदा पाबंदियों के बावजूद शिपमेंट को आगे बढ़ने की अनुमति देने के लिए 30 दिनों की छूट को मंजूरी दे दी है।
बता दें कि, अमेरिका ने यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद विभिन्न देशों को रूसी तेल नहीं खरीदने की धमकी दी थी। पश्चिमी देशों ने भी मॉस्को पर प्रतिबंध लगाए थे। लेकिन भारत रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक के रूप में उभरा था।ट्रंप की धमकियों के बावजूद भारत ने रूसी तेल खरीदना जारी रखा था. साथ ही साफ संदेश दिया था कि तेल कहां से खरीदना है, इसका फैसला भारत खुद करेगा।
रूस के तेल टैंकर समुद्र में क्यों खड़े थे दरअसल, रूस के तेल टैंकर समुद्र में इसलिए खड़े थे क्योंकि नए अमेरिकी प्रतिबंधों और भुगतान/बीमा की अनिश्चितता की वजह से उनका तेल तुरंत उतारा नहीं जा रहा था। यूएस ने रूसी तेल से जुड़ी कुछ शिपिंग कंपनियों और टैंकरों पर सख्त प्रतिबंध लगाए थे। इससे कई जहाजों के बीमा, भुगतान और पोर्ट एंट्री पर सवाल खड़े हो गए। भारत के रिफाइनर्स भी इंतजार करने लगे कि कहीं तेल खरीदना नियमों के खिलाफ तो नहीं होगा. इसलिए जहाजों को कुछ समय समुद्र में ही रोक दिया गया।
ताजा जानकारी के मुताबिक, सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियां- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड – जल्द डिलीवरी के लिए रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए व्यापारियों के साथ पहले से ही बातचीत कर रही हैं। बताया गया कि भारतीय सरकारी तेल रिफाइनरी कंपनियों ने व्यापारियों से पहले ही लगभग 20 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीद लिया है। कुछ रिफाइनरियों के लिए, यह कदम रूसी आपूर्ति की वापसी का संकेत है। रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, एचपीसीएल और एमआरपीएल को आखिरी बार नवंबर में रूसी कच्चे तेल की खेप मिली थी।



