खलनायक रिटर्न्स फर्स्ट लुक टीजर रिलीज, सोशल मीडिया पर मचा दिया तहलका

मुंबई। 33 साल पहले आई कल्ट क्लासिक ‘खलनायक’ ने बॉलीवुड को हिला कर रख दिया था। संजय दत्त ने ‘बल्लू’ बनकर ऐसा जादू किया कि आज भी फैंस उन्हें सिर्फ एक नाम से पुकारते हैं खलनायक। अब वो खलनायक जेल से फरार होकर और भी खूंखार, और भी डार्क अवतार में लौट आया है।
24 अप्रैल 2026 को ‘खलनायक रिटर्न्स’ का फर्स्ट लुक टीजर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर तहलका मच गया। टीजर में संजय दत्त का लुक देखकर फैंस पुरानी यादों में खो गए — चेहरे पर खून और कालिख, लंबे बाल, आंखों में वो वही खतरनाक चमक और बदन पर तबाही के निशान। ये कोई साधारण रिटर्न नहीं, बल्कि एक लेजेंडरी विलेन का और भी घातक, और भी इंटेंस कमबैक है।
टीजर में दिखा खौफनाक अवतार
टीजर की शुरुआत आग की लपटों और तबाही से होती है। चारों तरफ धुआं और लाशें बिखरी हुईं। अचानक बेड़ियों में जकड़ा एक हाथ दिखता है — और फिर स्क्रीन पर आते हैं संजय दत्त। जमीन पर बैठे, सिगरेट जलाते हुए, चेहरे पर खून-कालिख सना, लंबे बाल और उस घातक नजर।
बैकग्राउंड में पुराने आइकॉनिक डायलॉग और “नायक नहीं, खलनायक हूं मैं” की झलक सुनाई देती है। छोटा सा टीजर है, लेकिन सस्पेंस, थ्रिल और डार्कनेस से लबालब भरा हुआ। फैंस का कहना है — “ये तो ओरिजिनल से भी ज्यादा खतरनाक लग रहा है!”
1993 की ‘खलनायक’ — वो दौर जो आज भी याद है
सुभाष घई द्वारा निर्देशित और प्रोड्यूस की गई फिल्म ‘खलनायक’ 6 अगस्त 1993 को रिलीज हुई थी। संजय दत्त के अलावा जैकी श्रॉफ और माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिका में थे। फिल्म ने उस समय करीब 5 करोड़ के बजट में बनकर बॉक्स ऑफिस पर 20-24 करोड़ रुपये की कमाई की और साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी।
रिलीज से पहले फिल्म काफी विवादों में रही
संजय दत्त 1993 मुंबई ब्लास्ट केस में जेल गए थे, जिसकी वजह से रिलीज पर सवाल उठे। फिर गाने “चोली के पीछे क्या है” पर भी विवाद हुआ और इसे दूरदर्शन पर बैन तक कर दिया गया। लेकिन दर्शकों ने फिल्म को खूब पसंद किया और ‘बल्लू’ बन गया बॉलीवुड का सबसे यादगार विलेन।
संजय दत्त ने खुद बताया कि इस आइडिया की शुरुआत जेल में हुई थी। उन्होंने कहा,“जेल में मैंने आसपास के कैदियों से पूछा कि अगर ‘खलनायक’ की दूसरी भाग बने तो कौन देखेगा? करीब 4000 कैदियों ने कहा — हम सब देखेंगे। फिर मैंने उनसे कहा कि हर कोई अपनी तरफ से एक पेज लिखे। मुझे 4000 पेज पढ़ने पड़े। जेल से बाहर आने के बाद मैंने सुभाष घई सर को ये पढ़ने को दिया। उन्होंने कहा — ये बननी चाहिए।



