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छत्तीसगढ़

बेमेतरा जिला चिकित्सालय में मेडिकल इतिहास की बड़ी कामयाबी, एक्टोपिक प्रेगनेंसी के जटिल केस में समय पर सर्जरी, सुरक्षित बची गर्भवती

बेमेतरा जिला चिकित्सालय में मेडिकल इतिहास की बड़ी कामयाबी

एक्टोपिक प्रेगनेंसी के जटिल केस में समय पर सर्जरी, सुरक्षित बची गर्भवती

बेमेतरा जिला चिकित्सालय में वह कर दिखाया गया, जो कुछ साल पहले तक बड़े शहरों के निजी अस्पतालों तक सीमित माना जाता था। जानलेवा एक्टोपिक प्रेगनेंसी से जूझ रही एक गर्भवती महिला की समय रहते सर्जरी कर चिकित्सकों ने उसकी जिंदगी बचा ली। यह सफलता न सिर्फ डॉक्टरों की दक्षता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अब बेमेतरा जैसे जिले में भी गंभीर से गंभीर प्रसूति जटिलताओं का इलाज संभव हो रहा है। कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई के निर्देशन और स्वास्थ्य विभाग सीएमएचओ डॉ अमृत लाल रोहलेडर,जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री लता बंजारे के सशक्त नेतृत्व में जिला चिकित्सालय बेमेतरा लगातार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की मिसाल बन रहा है। 8 अप्रैल 2026 में सामने आए इस संवेदनशील मामले में ग्राम बाघुल निवासी महिला की दो महीने से मासिकधर्म नहीं आई ,चुकी महिला नसबंदी ऑपरेशन करवा चुकी थी इसलिए इसपर ध्यान नहीं दे पाई ,अचानक महिला घर में सीढ़ी से गिर गई और रक्तस्राव होने लगा ,महिला निजी अस्पताल में जांच करवाने से पता चला कि उन्हें गर्भ नली में गर्भ ठहर गया था जो कि चोट से नली फटने से पेट में रक्त स्राव जमा हो रहा है,खर्च अधिक होने कारण उक्त महिला नवागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गई जिन्हें गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल जिला चिकित्सालय बेमेतरा मातृ एवं शिशु चिकित्सालय के लिए रिफर किया गया, जहां वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. विभा बर्मन ने अपनी टीम के साथ जोखिम भरी लेकिन सफल सजरी को अंजाम दिया। और महिला की जान को बचा लिया गया।

क्या है एक्टोपिक प्रेगनेंसी– डॉ. विभा बर्मन ने बताया कि जब निषेचित अंडा गर्भाशय में न ठहरकर फैलोपियन ट्यूब, अंडाशय, पेट या सर्विक्स में विकसित होने लगता है, तो उसे एक्टोपिक प्रेगनेंसी कहा जाता है। लगभग 75 प्रतिशत मामलों में यह समस्या फैलोपियन ट्यूब में पाई जाती है, जो समय पर इलाज न मिलने पर महिला की जान के लिए बड़ा खतरा बन जाती है।

ये हैं इसके खतरनाक लक्षण– पेट के एक ओर तेज दर्द, पेल्विक क्षेत्र में खिंचाव, योनि से असामान्य रक्तस्त्राव, चक्कर आना, कंधे में दर्द और पेशाब या मल त्याग में परेशानी ये सभी संकेत गंभीर खतरे की ओर इशारा करते हैं।

टीमवर्क से बची जान– इस जटिल सर्जरी में गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. विभा बर्मन, निष्चेतना विशेषज्ञ डॉ. कुंदन लाल स्वर्णकार एवं डॉ अभिताभ साहू, पूरी मेडिकल टीम और सिविल सर्जन डॉ लोकेश साहू,एम सी एच प्रभारी डॉ सत्यप्रकाश कोसरिया एवं अस्पताल प्रमुख सलाहकार डॉ स्वाति यदु की अहम भूमिका रही। इस सफलता ने साफ कर दिया है कि अब बेमेतरा की गर्भवती महिलाओं को गंभीर जटिलताओं के लिए बाहर रेफर होने की मजबूरी नहीं रहेगी। जिला चिकित्सालय में उपलब्ध आधुनिक सुविधाएं और अनुभवी डॉक्टर मातृत्व सुरक्षा की दिशा में जिले को नई पहचान दिला रहे।

Bol Chhattisgarh Web Desk

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