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बैंककर्मी गबन करते रहे और जिम्मेदारों को पता ही नहीं चला, झारखण्ड निवासी के खाते में जमा हुआ लाखो रुपये…

रायपुर, 26 मई 2024 : राजधानी के जिला सहकारी बैंक में बैंककर्मियों ने करोडो का घोटाला कर दिया। बैंक के भीतर ही बैंक लुटता रहा और छह वर्षो तक प्रबंधन को इसकी जानकारी भी नहीं हुई। छह सालो में बैंककर्मियो ने 3 करोड़ रुपये से अधिक का चूना सीओडी शाखा को लगाया है। स्वतंत्र बोल की पड़ताल में बैंक में हुए घोटाले की परते खुल गई है।

बैंक के भीतर डाका :-

राजधानी के घडी चौक में जिला सहकारी बैंक के मुख्यालय में ग्राउंड फ्लोर स्थित सीओडी शाखा में साल 2016 से बैंककर्मी इंट्रेस्ट पेयबल अकाउंट से धीरे धीरे पैसे अपने और परिचितों के खाते में ट्रांसफर करते रहे। बैंक के विजिलेंस सेल ने जाँच के दौरान पाया कि कनिष्ट लिपिक चंद्रशेखर डग्गर के बैंक खाता क्रमांक 624038099913 और सहायक लेखापाल अरुण बैसवाड़े के खाता क्रमांक 624002261877 में मासिक वेतन के अतिरिक्त लाखो रुपये ट्रांसफर और लेन-देन हुआ था। बैंक प्रबंधन ने जिला सहकारी बैंक सुंदर नगर शाखा प्रबंधक लक्ष्मीकांत तिवारी के नेतृत्व में जाँच समिति का गठन किया।

समिति ने सप्ताह भर के भीतर प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट सौपा जिसमे, सेवानिवृत सहायक लेखापाल अरुण बैसवाड़े, कनिष्ट लिपिक चंद्रशेखर डग्गर और तत्कालीन सहायक लेखापाल संजय शर्मा ने आपसी मिलीभगत और कूटरचना कर एफडी, डीडी और पेटे खाते के ब्याज में गड़बड़ी की। इन्होने अपने परिचित बबलू शर्मा के नाम पर अलग बैंक खाता खोला और उसमे पैसे ट्रांसफर किया।

प्रारंभिक जाँच में 52 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई। झारखण्ड निवासी बबलू शर्मा के नाम पर बैंक में खाता खोलकर पैसे ट्रांसफर किया गया, बबलू संजय शर्मा का परिचित बताया जाता है। जाँच रिपोर्ट के बाद प्रबंधन ने तीनो ही भ्रष्ट आरोपितों को निलंबित कर दिया और 12 सितंबर 2023 को मौदहापारा पुलिस थाने में धारा 420, 34 अंतर्गत अपराध दर्ज कराया।

बैंक के दो दर्जन कर्मी शामिल :-

बैंक में हुए गबन में पुलिस ने प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट के आधार पर तीन लोगो के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया है, जबकि इस घोटाले में दो सर्जन से अधिक कर्मचारी शामिल है। बैंक द्वारा गठित जाँच दल ने विस्तृत जाँच रिपोर्ट में 3 करोड़ 9 लाख,9530 रुपये के गबन की पुष्टि की। जिसमे अरुण बैसवाड़े ने 11555716 रुपये, चंद्रशेखर डग्गर ने 8015387 रुपये, संजय शर्मा ने 2387732 रुपये अपने खाते में जमा किया। इन कर्मियों ने अपने परिचित बैंककर्मी अशोक कुमार पटेल के खाते में 275807 रुपये, विजय वर्मा 456999 रुपये, आनंद शर्मा(मृत) के खाते में 131423 रुपये और झारखण्ड के बबलू शर्मा के खाते में 8090466 रुपये ट्रांसफर किया था।

इन कर्मियों का साथ बैंक में पदस्थ चेकर और मेकर ने भी दिया और उनके खातों में भी लाखो रुपये जमा हुआ, जिसमे सहायक लेखापाल नोखेलाल साहू के 231759 रुपये, शिला गोस्वामी के 369400 रुपये, पवन सेन 3085275 रुपये, सुरेश सिंह क्षत्रिय 3165773 रुपये नरेश कुमार बैस 53000 रुपये, रिफत जबीं सुलतान में 4013295 रुपये, जमना तांडी नाग 149913 रुपये और ममता वर्मा द्वारा 10000 रुपये जमा आरोपितों के खाते में ट्रांसफर किया गया था। इस दौरान बैंक में पदस्थ रहे शाखा प्रबंधक प्रकाश गावरले और प्रमोद कुमार शर्मा भी पुरे घोटाले में अप्रत्यक्ष तौर पर शामिल है। बैंक ने सभी कर्मियों को नोटिस देकर जवाब मांगा है। बैंक को लुटने में एक अन्य कर्मचारी पंकज शराफ सहायक लेखापाल ने अपने और अपनी पत्नी प्रमिला सराफ एवं बैंककर्मी मोहन लाल साहू के खाते में 75000 रुपये सहित कुल 3916696 रुपये ट्रांसफर कर दिया, उसे भी आरोप पत्र जारी किया गया है।

बैंक सीईओ भी जाँच के दायरे में :-

बैंक मुख्यालय के ग्राउंड फ्लोर में संचालित सीओडी शाखा में सालो से गबन होता रहा है और बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को जानकारी भी नहीं हुई। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार जिम्मेदारों का खुला सरक्षण आरोपितों और उनके सहयोगियों को रहा, जिसके चलते ही गबन रूपी पेड़ छह सालो तक फलता फूलता रहा। 2016 से लेकर अब तक में एसपी चंद्राकर, जगमोहन तनेजा, एसपी चंद्राकर, प्रभात कुमार मिश्रा, एसके जोशी, फिर एसपी चंद्राकर दोबारा प्रभात कुमार मिश्रा और अपेक्षा व्यास सीईओ रहे है। प्रभात मिश्रा ने 2023 में अपराध दर्ज कराया पर आगे कार्यवाही की हिम्मत नहीं जुटा सके। जनवरी 2024 में सीईओ का चार्ज संभालने के बाद अपेक्षा व्यास ने सभी जिम्मेदारों को नोटिस जारी कर विभागीय जाँच संस्थित किया है।

पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली :-

बैंक प्रबंधन की शिकायत पर पुलिस ने तीन कर्मियों पर अपराध दर्ज किया पर जाँच में गंभीरता नहीं दिखाया। सभी आरोपित स्थानीय होने के बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है, बताते है कि आरोपितों की अग्रिम जमानत याचिका भी ख़ारिज हो चुकी है। उधर बैंक प्रबंधन ने दूसरी जाँच रिपोर्ट 11 दिसंबर 2023 को मौदहापारा पुलिस को भेजा था, जिसमे अन्य आरोपितों के नाम शामिल है। जिन्होंने कूटरचना कर सरकारी धन धन का गबन किया है, पर पुलिस की जाँच आठ महीने बाद भी एक कदम आगे नहीं बढ़ पाई है। बैंककर्मियों के अनुसार अपराध दर्ज होने के बाद पुलिस कभी जाँच करने बैंक नहीं गई है ना ही कभी बयां देने किसी को थाने बुलाया, जिससे पुलिस की सुस्ती पर सवाल उठ रहा है।

Bol CG Desk

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