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De-listing Maharally डी-लिस्टिंग महारैली बना जन आंदोलन, जिला,प्रदेश के बाद अब राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की तैयारी

De-listing Maharally जनजाति समाज के साथ वर्तमान समय में जो अन्याय हो रहा है। वह अब किसी से छुपा नही है। इस बात को लेकर जनजाति सुरक्षा मंच वर्ष 2006 से लगातार कार्य कर रही है। जनजाति सुरक्षा मंच ने देश के सभी राज्यों में जिला स्तर, प्रदेश स्तर पर क्रमशः आंदोलन किया है। प्रान्त स्तर के आंदोलन पश्चात राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन करने की तैयारी है। De-listing Maharally

16 अप्रेल को राम मंदिर VIP रोड रायपुर के सामने महारैली का आयोजन जनजाति सुरक्षा मंच के द्वारा किया गया। जिसमें हजारों की संख्या में वनवासी बंधु शामिल हुए।
आंदोलन व महारैली में पहुँचे जनजाति समाज के लोगों ने सभा को संबोधित किया। जनजाति नेताओं ने भी, साथ ही जनजाति समाज के लिए कार्य कर रहे लोगों ने मीडिया के माध्यम से अपना विचार प्रस्तुत किया है।

De-listing Maharally को लेकर क्या कहते हैं जनजाति नेता

प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा कि पिता जी घर वापसी अभियान चलाते थे। जिसमें जनजाति वर्ग जो गलत तरीके से धर्मांतरण कर लेते थे। उनका घर वापसी करते थे। उनका परिवार जनजाति समाज के लिए कई वर्षों से कार्य कर रहा है। उन्होंने आगे कहा को धर्मांतरण कर रहे हैं वे रास्ते को खंडित करने के षड्यंत्र के तहत कार्य कर रहे हैं उन्होंने कहा जनजाति जब अपना आवाज उठाता है, संघर्ष करता है, सामने आता है तो अच्छे-अच्छे षड्यंत्रकारी पीछे हट जाते हैं।

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De-listing Maharally
De-listing Maharally को लेकर प्रबल ने की मीडिया से बातचीत

प्रबल प्रताप ने कहा कि इसलिए ऐसे कानून बनाने की आवश्यकता है जिससे यह धर्मांतरण रुक जाए डीलिस्टिंग धर्मांतरण को रोकने जनजातियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए आवश्यक है जो भी जन जाति धर्म आंतरिक होता है उसका सभी आरक्षण बंद कर देना चाहिए जो उनको सांस की सुविधाएं दी जाती हैं वह सभी बंद कर देनी चाहिए प्रबल प्रताप ने आगे कहा कि जो धर्मांतरण कर रहे हैं वह समाज को तोड़ने का काम करने हैं समाज में संघर्ष की स्थिति पैदा कर रहे हैं।


कांग्रेस के कारण ही आज जनजातियों का शोषण हो रहा है। उनका काम ही है गलत तरीके से लोगों को कंफ्यूज करना। कांग्रेस के बयानबाजी से कुछ फर्क नही पड़ने वाला है। डी लिस्टिंग का कार्य हो कर रहेगा।

डी लिस्टिंग से क्या रुकेगा धर्मांतरण- विश्व हिंदू परिषद छत्तीसगढ़

विश्व हिंदू परिषद छत्तीसगढ़ प्रान्त के कार्यकारी अध्यक्ष चंद्रशेखर वर्मा ने कहा कि डी लिस्टिंग से निश्चित तौर पर धर्मांतरण रुकेगा और बहुत सारे लोग घर वापस आएंगे। क्योंकि जो धर्मान्तरित ईसाई हैं। ऐसे ईसाई ही 70% से 80% आरक्षण का लाभ ले लेते हैं। और जो धर्मान्तरित नही हुए हैं, ऐसे जो मूल जनजाति समाज है आरक्षण के लाभ से वंचित रह जाते हैं। इसलिए यह मांग जायज है।
और इस सरकार को यथाशीघ्र कानून बनाकर पूरा करना चाहिए। हम De-listing Maharally समर्थक हैं।

कार्तिक उरांव के सपनों को पूरा करने जनजाति समाज आगे बढ़ रहा है- रवि भगत

जनजाति युवा नेता रवि भगत ने कहा कि यह मेरा मांग नही यह पुरे जनजाति समाज की मांग है। जिनके लिए जनजाति समाज के नेता कार्तिक उरांव जो कांग्रेस के नेता रहे हैं। सांसद थे, मंत्री थे जिन्हें जनजाति समाज की पीड़ा, समस्याओं का एहसास हुआ। जिन्होंने जनजाति समाज के लिए काफी लंबी लड़ाई लड़ी।
और इस लड़ाई में कहीं न कहीं षड़यंत्र पूर्वक उनकी हत्या हुई। आज उनके सपनों को आगे बढ़ाने, पूरा करने का काम जनजाति सुरक्षा मंच कर रहा है।


डी लिस्टिंग के माध्यम से देश भर जनजागरण का कार्य De-listing Maharally चक रहा है। जिला स्तर से आंदोलन करते हुए आज प्रान्त स्तर पर यह कार्यक्रम किया गया है।
सरकार डरी हुई है। नगर के लोग न देखें इसलिए De-listing Maharally करने की अनुमति नही दी गयी। रैली को रोक दिया गया।

डी लिस्टिंग से जनजाति समाज को होगा फायदा- पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर

डीलिस्टिंग होगा तो फायदा होगा और यह नहीं हुआ है इस कारण से मूल जनजाति समाज का अधिकार छीना जा रहा है। जो धर्म अंतरित ईसाई हैं उन्हें दोनों तरफ से फायदा होता है। जो जनजाति भोले भाले हैं उनका शोषण हो रहा है। कन्वर्टेड ईसाई दोनों तरफ से लाभ लेकर आगे बढ़ रहे हैं। ननकीराम कंवर ने कहा कि हम मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से  डी लिस्टिंग की मांग नहीं कर रहे हैं। यह मांग केंद्र सरकार से है। भूपेश बघेल को कोई ज्ञान नहीं है। डीलिस्टिंग करने की मांग भारत सरकार से ही की जा रही है।

विदेशियों के धर्म जनजातियों पर थोपने का कार्य धर्मांतरण, इसे रोकने डी लिस्टिंग जरूरी


रामसेवक पैकरा पूर्व मंत्री ने कहा कि जो जनजाति अपने मूल संस्कृति से अलग हो गया है। जो ईसाई हो गए हैं। ऐसे लोगों के आरक्षण को खत्म किया जाए। इस मांग को लेकर ही पूरे देश में डी लिस्टिंग अभियान चल रहा है। De-listing Maharally


यह मांग कार्तिक उरांव जी ने उठाई थी। जिसे अब जनजाति समाज लेकर आगे बढ़ रहा है।
200 सालों से अंग्रेजों ने राज किया। उनका ही यह ईसाई धर्म था। अब धर्मांतरण के माध्यम से भोले भाले जनजाति समाज को ईसाई बनाने का कार्य चल रहा है। जिसे रोकने के लिये। मूल जनजाति समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए डी लिस्टिंग जरूरी है।De-listing Maharally

शिक्षा या अन्य क्षेत्रों में दोहरा आरक्षण लेने वालों की हो डी लिस्टिंग- रामविचार नेताम

सबको यह पता है कि लंबे समय से देश में धर्मांतरण का कार्य चल रहा है। धर्मान्तरित ईसाई जनजाति समाज के लोगों का शोषण कर रहे हैं। जो अपनी संस्कृति अपने परंपरा से जुड़े हैं उन्हें आरक्षण का लाभ नही मिल पा रहा है। डी लिस्टिंग के माध्यम से मूल जनजाति समाज के हितों की रक्षा होगी। De-listing Maharally

समाज के रीति रिवाजों को नही मानने वाले, जो ईसाई हो गए उनका आरक्षण खत्म हो- लता उसेंडी


निश्चित तौर पर जनजाति समाज के वे लोग जो समाज के रीति रिवाज को नहीं मानते हैं। जिन्होंने ईसाई धर्म ग्रहण कर लिया है समाज की सामाजिक बैठक में भी समाज के नियमों का पालन नहीं करने की बात जो कहते हैं। ऐसे लोगों का डीलिस्टिंग आवश्यक है। De-listing Maharally

लता उसेंडी ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि यह मांग व आंदोलन पूरे देश में चल रहा है और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को आगे आना चाहिए। यदि वे जनजातीय समाज की सुरक्षा और हितों की बात करते हैं तो उन्हें स्वयं आगे आकर इस आंदोलन का समर्थन करना चाहिए।

इसे भी पढ़ें https://bolchhattisgarh.in/delisting-thousands-of-people-are-reaching/

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