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अनोखी सांस्कृतिक परंपरा का इतिहास, 75 वर्षों से जारी है ‘रहस बेड़ा’ कृष्ण लीला
अनोखी सांस्कृतिक परंपरा का इतिहास, 75 वर्षों से जारी है ‘रहस बेड़ा’ कृष्ण लीला
इस अनूठे आयोजन की शुरुआत 75 साल पहले गांव के तत्कालीन विधायक कुलपत सिंह भारद्वाज ने की थी. गांव के वरिष्ठ नागरिक चितराम बताते हैं कि यह आयोजन नवरात्र से शुरू होकर दशहरे तक चलता है. इसमें रासलीला के साथ-साथ नाचा-गम्मत जैसी स्थानीय कला का प्रदर्शन भी किया जाता है, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा है.
इस अनूठे आयोजन की शुरुआत 75 साल पहले गांव के तत्कालीन विधायक कुलपत सिंह भारद्वाज ने की थी. गांव के वरिष्ठ नागरिक चितराम बताते हैं कि यह आयोजन नवरात्र से शुरू होकर दशहरे तक चलता है. इसमें रासलीला के साथ-साथ नाचा-गम्मत जैसी स्थानीय कला का प्रदर्शन भी किया जाता है, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा है.
