देवर्षि नारद जयंती पत्रकार पुरस्कार सम्मान समारोह में वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा, आकांक्षा तिवारी और रूपेश यादव हुए सम्मानित, मुख्य वक्ता प्रखर श्रीवास्तव का “वर्तमान परिस्थिति में पत्रकारिता की चुनौतियां” विषय पर वक्तव्य
रायपुर, 13 जून 2026। राजधानी के विमतारा हॉल में देवर्षि नारद जयंती पत्रकार सम्मान समारोह 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आईआईआईटी नवा रायपुर के कुलपति एवं निदेशक प्रो. डॉ. ओमप्रकाश व्यास मुख्य अतिथि तथा डीडी न्यूज़ दिल्ली के वरिष्ठ सलाहकार संपादक एवं लेखक प्रखर श्रीवास्तव मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित हुए। इस कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ पत्रकार आर कृष्ण दास थे।

समारोह में वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा को आद्य पत्रकार देवर्षि नारद पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

आकांक्षा तिवारी को वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय बबन प्रसाद मिश्रा स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया।

रुपेश यादव को वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय रमेश नैयर स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया।
मुख्य वक्ता प्रखर श्रीवास्तव ने कहा कि प्रेस फ्रीडम इंडेक्स सीमित आंकड़ों से तैयार होता है और इसे बनाने वाले भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के प्रति पूर्वाग्रह रखते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र है और लोग अपने विचारों की सहज अभिव्यक्ति करते हैं। ऐसे इंडेक्स सच्ची पत्रकारिता की तस्वीर के प्रतिनिधि नहीं होते।प्रखर श्रीवास्तव ने कहा कि मोदी से पहले पत्रकार प्रधानमंत्री के साथ विदेश जाते थे। हर जगह शराब की भरमार रहती थी। यह सब उन्होंने बंद करा दिया, यही विशेषाधिकार का लाभ उठाने वाले पत्रकारों के दुख का कारण है।

उन्होंने कहा कि उस समय विमान में अधिकारी कम पत्रकार ज्यादा नजर आते थे।उन्होंने कहा कि देश में मीडिया को स्वतंत्रता है। दूरदर्शन पहले केवल सत्तातंत्र की बात करता था, दूसरे दलों के नेताओं को वैचारिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं थी। अब दूरदर्शन में सभी दलों की बात रखी जाती है। उन्होंने कांग्रेस शासनकाल में नरेंद्र मोदी के इंटरव्यू को डीडी न्यूज द्वारा न चलाए जाने का भी उल्लेख किया। प्रखर श्रीवास्तव ने कहा कि कांग्रेस की सरकारों में पत्रकारिता पर सेंसर होता है। छत्तीसगढ़ में पिछली कांग्रेस सरकार में पत्रकारों को बेवजह मामलों में फंसाया गया, जेल भेजा गया।

दिल्ली के पत्रकारों को राजधानी के पत्रकारों के ऊपर बिठाया गया। उन्होंने कहा कि कुछ पत्रकारों को कांग्रेस सरकार के समय मिलने वाली विशेष सुविधाएं भंग कर दी गई हैं, इसलिए वे दुखी हैं। नार्वे की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां की पत्रकार का प्रश्न भारत के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित था। अंतरराष्ट्रीय मीडिया का एक बड़ा तबका भारत के बारे में न केवल विरोधी नजरिया रखता है अपितु सच्ची तस्वीर को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करता है, जबकि दुनिया के दूसरे देशों में मानवाधिकार हनन के मामलों पर चुप्पी साध लेता है।
प्रखर श्रीवास्तव ने नेहरू के दौर को याद करते हुए कहा कि केआर मलकानी द्वारा आर्गेनाइजर में नेहरू-लियाकत पैक्ट पर लेख छापने पर नेहरू ने अधिकारियों को आर्गेनाइजर को चेक कराने का फरमान जारी किया था। उन्होंने यह भी कहा कि गांधी की हत्या के बाद पश्चिमी भारत में ब्राह्मणों का नरसंहार हुआ लेकिन इसकी कवरेज नहीं हुई।

मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. ओमप्रकाश व्यास ने कहा कि डिजिटल मीडिया के युग में फेक न्यूज की समस्या बड़ी है। खबरों की प्रामाणिकता और विश्वसनीयता एक बड़ी चुनौती है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस भी अब एक बड़ी समस्या बनकर सामने आया है। कार्यक्रम में शहर के वरिष्ठ पत्रकार, संपादक एवं मीडिया प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।



