नवरात्र विशेष : सरगुजा में देवी रूप में होती है विष्णु भगवान की पूजा
सरगुजा के सूरजपुर जिले के रमकोला गांव में माता के मंदिर में मूर्ति किसी देवी की नहीं बल्कि भगवान विष्णु जी की है, मूर्ति को गौर से देखने से पता चलता है, कि शंख और चक्र उनके हाथ में है.
यहां के जंगल में वर्षों पुराना एक धाम है, जिसे यहां के लोग देवीझरिया या तो माता ज्वालामुखी के नाम से जानते हैं. लोगों की मन्नतें भी पूरी होती हैं.
यहां के ग्रामीण चैत्र व शारदीय नवरात्र में धूमधाम से पूजा अर्चना करते है. जिला सूरजपुर के पुरातत्व जिला संघ के अनुसार वहां लोगों की आस्था देवी की रुप में है. लेकिन देखने के बाद पता चला चलता है कि यह मूर्ति 11वीं से 16 वीं शताब्दी के करीब की बताई जाती है.

छत्तीसगढ़ शासन के रायपुर के पुरातत्व विभाग के उपसंचालक भी पुष्टि कर चुके हैं, कि यह मूर्ति किसी देवी की नहीं बल्कि भगवान विष्णु की है. लेकिन यहां के लोगों की आस्था है कि इनकी मन्नतें भी माता ज्वालामुखी के नाम से पूरी होती हैं.
जिस जगह पर भगवान विष्णु की पूजा देवी की रुप में की जाती है, वहां पर गोड़ राजा के महल के अवशेष पड़े मिले थे, और उसी के पास में यह मूर्ति है. जहां देवीझरिया और माता ज्वालामुखी के नाम से जाना जाता है.

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