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छत्तीसगढ़ में पितृपक्ष में तोरई और इसके पत्तों का है विशेष महत्व, जानें परंपरा
छत्तीसगढ़ में पितृपक्ष में तोरई और इसके पत्तों का है विशेष महत्व, जानें परंपरापूर्णिमा श्राद्ध 17 सितम्बर से प्रारंभ होगा और 18 तारीख से परेवा और पूर्णिमा दोनों एक साथ मनाया जाएगा, पितृों को भोग उत्तर और पूर्व दिशा में दिया जाता हैं. इसमें चावल तिल और जौ मिलाया जाता है और पितृ को अर्पण करना है तो दक्षिण दिशा में दिया जाता हैं.
पूर्णिमा श्राद्ध 17 सितम्बर से प्रारंभ होगा और 18 तारीख से परेवा और पूर्णिमा दोनों एक साथ मनाया जाएगा, पितृों को भोग उत्तर और पूर्व दिशा में दिया जाता हैं. इसमें चावल तिल और जौ मिलाया जाता है और पितृ को अर्पण करना है तो दक्षिण दिशा में दिया जाता हैं.
