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एक तरफ पिता का पार्थिव शरीर, दूसरी तरफ देश का कर्तव्य…बेटे ने चुना ये रास्ता
एक तरफ पिता का पार्थिव शरीर, दूसरी तरफ देश का कर्तव्य…बेटे ने चुना ये रास्ताचूड़ामणि की ड्यूटी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में लगी हुई थी. जब उन्हें अपने पिता की मृत्यु की खबर मिली, तो वे गहरे शोक में डूब गए. एक तरफ पिता के अंतिम दर्शन की व्याकुलता थी, तो दूसरी तरफ देश के लोकतांत्रिक कर्तव्य का पालन करने की जिम्मेदारी थी.
चूड़ामणि की ड्यूटी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में लगी हुई थी. जब उन्हें अपने पिता की मृत्यु की खबर मिली, तो वे गहरे शोक में डूब गए. एक तरफ पिता के अंतिम दर्शन की व्याकुलता थी, तो दूसरी तरफ देश के लोकतांत्रिक कर्तव्य का पालन करने की जिम्मेदारी थी.
