छत्तीसगढ़ विधानसभा में SIR पर विधानसभा में घमासान: ‘19 लाख लोग लापता’—चरणदास महंत महंत का आरोप

रायपुर 19 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा में SIR का मुद्दा बुधवार को जोरदार तरीके से उठा, जिससे सदन का माहौल गरमा गया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस विषय पर स्थगन प्रस्ताव लाते हुए गंभीर आरोप लगाए और तत्काल चर्चा की मांग की।
महंत ने सदन में कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान प्रदेश में 19 लाख 13 हजार 450 लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनका आज तक कोई पता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि न तो इन लोगों के खिलाफ कोई स्पष्ट रिपोर्ट है और न ही उनकी स्थिति के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध है।
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर लोगों के “गायब” होने के बावजूद न तो पुलिस और न ही सरकार इस मामले को लेकर गंभीर नजर आ रही है। उन्होंने मांग की कि इस गंभीर मुद्दे पर सदन में विस्तृत चर्चा कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
महंत की इस मांग के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। विपक्ष जहां इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा बड़ा मामला बता रहा था, वहीं सत्ता पक्ष ने इसे राजनीतिक आरोप करार दिया। सत्तापक्ष के सदस्यों ने कहा कि कांग्रेस के पास ठोस मुद्दे नहीं हैं, इसलिए वह इस तरह के विषयों को उठाकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है।
इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यह विषय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है, इसलिए इस पर विधानसभा में चर्चा नहीं कराई जा सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि SIR जैसी प्रक्रिया चुनाव आयोग से संबंधित होती है, जो एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है।
विपक्ष द्वारा लगातार दबाव बनाए जाने के बावजूद आसंदी ने स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य कर दिया। इसके बाद सदन में हंगामा और बढ़ गया। नाराज विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए अपनी सीटों से उठ खड़े हुए और अंततः विरोध जताते हुए सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया।कांग्रेस ने आरोप लगाया कि SIR की पूरी प्रक्रिया भाजपा के इशारे पर कराई गई है, जिससे बड़े पैमाने पर लोगों के नाम हटाए गए हैं। वहीं सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया।



