छत्तीसगढ़ में तरबूज की नई प्रजाति की खेती, बाहर से हरा और काटने पर निकलता है पीला-लाल

बैकुंठपुर। जिला मुख्यालय बैकुंठपुर प्रगतिशील किसान भरत रजवाड़े ने एक एकड़ में तरबूज की नई प्रजाति की खेती की है। जो सप्ताहभर के भीतर तैयार होगी। प्रगतिशील किसान भरत पारम्परिक खेती से अलग रंग-बिरंगे खास किस्म के तरबूज की खेती कर लोगों का ध्यान आकर्षित और प्रेरित कर रहे हैं। साथ ही बल्कि अच्छी आमदनी भी कमा रहे हैं। उनके खेत में उगाए गए तरबूज थोड़ा अलग है और स्वाद में भी खास है।
उनका कहना है कि अपने खेत में तीन अलग-अलग प्रकार के तरबूजों का प्रयोग किया है। जिसमें तरबूज का बाहरी हिस्सा (छिलका) पीले रंग का है. लेकिन काटने पर अंदर का गुदा लाल है। वहीं दूसरी-तीसरी वैरायटी का तरबूज बाहर से हरा है, लेकिन उसको काटने पर अंदर का गूदा पीले रंग निकलता है।
जो स्वाद में सबसे ज्यादा मीठा होता है। जिसमें पानी की मात्रा भी भरपूर है। यह खास किस्म का तरबूज बाजार में 40 से 50 रुपए (जबकि स्थानीय तरबूज 20 रुपए) प्रति किलो तक बिक रहा है। फसल लगभग तैयार होने को है। अभी से लोग सीधे खेत से इसे यखरीदने पहुंच रहे हैं। किसान ने पिछले साल प्रयोग के तौर पर पहली बार तरबूज की नई पांच वैरायटी की खेती की थी, लेकिन सिर्फ दो वैरायटी में ही सफलता मिली थी।
तुराई की 3 किस्म, सफेद करेला की भी खेती
किसान भरत ने बताया कि जुचिनी की भी खेती की है। जिसे स्थानीय स्तर पर तोरी या तुरई कहते हैं। तीन अलग-अलग वैरायटी की तुराई अपने खेत में लगाई है। जिनमें गोल आकार लबी हरे रंग और पीले रंग की तुराई शामिल हैं। सभी किस्में स्वाद में बेहद लाजवाथ है। इसके अलावा सफेद करेला भी उगाया है. जो पारंपरिक करा करेला में अलग है। सफेद करेला भी उगाया है, जो पारंपरिक हरा करेला से अलग है।
सफ़ेद करेला की खासियत है कि इसमें कड़वाहट अपेक्षाकृत काम होती है। जिससे लोग इसे ज्यादा पसंद कर रहे है। किसान ऑनलाइन बीज मांगकर खेतों में उगाई है। हांलाकि नई प्रजाति के बीज काफी महंगे है। मात्र 20 ग्राम की कीमत 1800-1900 रुपये है। हबकि सामान्य तरबूज के बीज की कीमत 20 ग्राम का 200-300 रुपये है। उनका कहना है कि तरबूज के दोनोँ किस्म की प्रजाति को पिछले साल पहली बार प्रयोग के तौर पर लगाई थी लेकिन उम्मीद से कहीं बेहतर परिणाम मिले थे।


